| 000 | 02115nam a2200205 4500 | ||
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| 005 | 20260520164320.0 | ||
| 008 | 260520b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a9789334333251 | ||
| 040 | _cAL | ||
| 041 | _aKonkani Devnagari | ||
| 082 |
_a891.46109 _bPAWK |
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| 100 |
_aRajya Pawar _9264205 |
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| 100 |
_9264204 _dराज्य पवार |
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| 245 |
_aKavyakriya _b: काव्यक्रिया |
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| 260 |
_aBori _bSanika Prakashan _c2025 |
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| 300 |
_a108p _bPB _c21.5x14cm |
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| 365 |
_2Konkani _c₹ _d150.00 _e05-03-2026 |
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| 520 | _aभारतीय काव्यशास्त्रांत काव्यक्रिया म्हळ्यार कवीची सर्जनात्मक निर्मितीची प्रक्रिया (Creative Process). डॉ. राजय पवार हांणी आपल्या अभ्यासांत आनी व्याख्यानांत हे प्रक्रियेचेर उजवाड घायला:कवि-व्यापार आनी कल्पनाशक्त: कल्पनेतल्यान (Imagination) सद्याच्या अणभवांक सोबीत उतरांनी कशे तरेन गुंफप, हाचो आस्पाव काव्यक्रियेंत जाता.काव्याची निर्मिती: कवी आपल्या मनांतल्या भावनांक आनी विचारांक 'शब्द आनी अर्थाच्या' ताळमेळान काव्याचें रूप कशें दितात, हें प्रक्रियेचें मूळ रहस्य आसा.काव्य प्रयोजन: काव्यान वाचप्याक वा आयकप्याक परम आनंद मेळचो आनी समाजाचें कल्याण जावचें, होच काव्यक्रियेचो निमाणो उद्देश आसता. | ||
| 942 |
_2ddc _cDB |
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| 999 |
_c241480 _d241480 |
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