शे! कावलो आपुडलो' (She! Kavlo Apudla) लेखक और निर्देशक दीपराज सातोरदेकर (Deepraj Satordekar) द्वारा लिखित एक बेहद लोकप्रिय और पुरस्कार विजेता कोंकणी नाटक (Drama/Play) है। इसे गोवा की कला अकादमी द्वारा आयोजित 47वीं कोंकणी नाटक प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ नाटक, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन और सर्वश्रेष्ठ पटकथा (Script Writing) सहित कई श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार मिला था। चूंकि यह एक समकालीन थियेटर नाटक (Stage Play) है और मूल रूप से पुस्तक के बजाय रंगमंच पर मंचन के लिए प्रसिद्ध है, इसकी विस्तृत नाटक की मुख्य विशेषताएं और पृष्ठभूमि (Summary Points) कथानक और विषय (Theme): यह नाटक कोंकणी संस्कृति, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक ताने-बाने को छूता है। 'कावलो आपुडलो' का शाब्दिक अर्थ कौवे से जुड़े किसी पारंपरिक मुहावरे या शगुन की ओर इशारा करता है, जो मानवीय स्वभाव, अंधविश्वास या पारिवारिक परिस्थितियों के इर्द-गिर्द बुना गया है। मुख्य पात्र (Characters): * नाटक में 'शीता' (Shita) का किरदार मुख्य है, जिसे हर्षला पाटिल बोरकर ने निभाया था और उन्हें इसके लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला था। अन्य महत्वपूर्ण पात्रों में 'दादा' (Dada) (कुणाल मधुकर बोरकर द्वारा अभिनीत) और 'दुर्गा' (Durga) (नेहा गुडे द्वारा अभिनीत) शामिल हैं, जो कहानी को आगे बढ़ाते हैं। शैली: यह एक गंभीर सामाजिक-पारिवारिक नाटक है, जिसमें मानवीय भावनाओं, संघर्षों और समाज की वास्तविकताओं को मंच पर जीवंत रूप में दर्शाया गया है। यदि आप इस नाटक के किसी विशिष्ट दृश्य, चरित्र या इसके विशेष भाग के बारे में जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएं!लिखित कहानी या सारांश सार्वजनिक डोमेन में सीमित है। हालांकि, नाटक के मुख्य पहलुओं का सारांश नीचे दिया गया है: