Vyakaranchandroday: Vol 2 (Krit va tadvit) (Record no. 98261)
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| 000 -LEADER | |
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| fixed length control field | 05050nam a2200217Ia 4500 |
| 003 - CONTROL NUMBER IDENTIFIER | |
| control field | OSt |
| 005 - DATE AND TIME OF LATEST TRANSACTION | |
| control field | 20260512161403.0 |
| 008 - FIXED-LENGTH DATA ELEMENTS--GENERAL INFORMATION | |
| fixed length control field | 210210b1970 xxu||||| |||| 00| 0 eng d |
| 040 ## - CATALOGING SOURCE | |
| Transcribing agency | AL |
| 041 ## - LANGUAGE CODE | |
| Language code of text/sound track or separate title | Sanskrit |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | S491.5 SHAV |
| 100 ## - MAIN ENTRY--PERSONAL NAME | |
| Personal name | SHASTRI (Charudev). |
| Dates associated with a name | चारुदेव शास्त्री |
| 9 (RLIN) | 263834 |
| 245 ## - TITLE STATEMENT | |
| Title | Vyakaranchandroday: Vol 2 (Krit va tadvit) |
| Remainder of title | व्याकरणचंद्रोदय: द्वितीय खण्ड (कृर्त् व तद्वित्) |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. | |
| Place of publication, distribution, etc. | Dilli. |
| Name of publisher, distributor, etc. | Motilal Banarsidass., |
| Date of publication, distribution, etc. | 1970 |
| 300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION | |
| Extent | 507 |
| 440 ## - SERIES STATEMENT/ADDED ENTRY--TITLE | |
| Title | 2 |
| 9 (RLIN) | 263835 |
| 520 ## - SUMMARY, ETC. | |
| Summary, etc. | व्याकरणचन्द्रोदय के पाँच खण्ड प्रकाशित हो चुके है। प्रथमखण्ड कारक-निरूपणात्मक है। द्वितीय कृतिद्धित-विषयक है। तृतीय खण्ड तिङ् व्याख्यानपरक है। चतुर्थ स्त्रीप्रत्यय, सुबन्त, अव्यय-परक है। पञ्चम खण्ड शिखा, संजा, परिभाषा, संहिता, लिङ्ग-विषयक है। लक्ष्यलक्षणे व्याकरणम्-यह सर्वसम्मत व्याकरण का स्वरूप माना जाता है। तो भी पूर्व विद्यमान व्याकृतिग्रन्थों में लक्ष्य का अत्यल्प उपादान है। पुरानी शैली से लिखे गये वृत्ति आदि ग्रन्थों में एक-दो लक्ष्यों में लक्षण (सूत्र) की प्रवृत्ति को दिखाने से वृत्तिकारादि अपने को कृतार्थ मानते हैं। नूतन रीति से लिखे गये व्याकरणग्रंथों में प्रयोगों के उदाहरण देने का प्रयत्न तो है, पर वे उदाहरण या तो स्वयं-घटित होते हैं, या भट्टिकाव्यादि में उठाये जाते हैं, जहाँ व्याकरण सिखाने के लिए वे घड़े गये हैं और जिनमें अनेकानेक ऐसे हैं जो साहित्य में कहीं भी प्रयुक्त नहीं हुए, अतः अव्यवहार्य हैं। इस वर्ग के विद्वान भूल जाते हैं कि व्याकर अन्वाख्यान-स्मृति हैं-व्याक्रियन्ते पदानीह क्रियन्ते नूतनानि न।<br/><br/>इस कृति का वाग्व्यवहार सिखाना प्रधान लक्ष्य है। प्रक्रिया इस साध्य में साधनमात्र है। व्यवहार उपकार्य है, प्रक्रिया उपकारक। अतः इस कृति में जहाँ सूत्रादि की विशद व्याख्या की गई है, सूत्रादि की प्रवृत्ति द्वारा सरल, शङ्कासमाधान-सहित, क्रमबद्ध रूपसिद्धि दी गई है, वहाँ वैदिक-लौकिक उभयविध वाङ्मय से शतशः वाक्य<br/>उद्धृत किये गए हैं जो व्याकरण-व्युत्पादित उस-उस लक्ष्य को प्रयोगावतीर्ण दिखाते हुए उसकी साधुता को यथेष्ट रूप से प्रमाणित करते है और व्यवहार सिखाने में अत्यन्तोपकारक हैं।<br/><br/>स्थान-स्थान पर अपेक्षित नूतनार्थोपन्यास, पूर्वमतसमीक्षा, संक्षिप्त वैयाकरणो-क्तिविशदीकरण, यथासंभव अष्टाध्यायीगत-सूत्रक्रमाश्रयण आदि असामान्य धर्म असामान्य धर्म इस कृति को अन्य कृतियों से पृथक् करते हैं और मौलिकता की ओर संकेत करते है। |
| 690 ## - LOCAL SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM (OCLC, RLIN) | |
| Topical term or geographic name as entry element | Sanskrit Grammar |
| 9 (RLIN) | 263836 |
| 906 ## - LOCAL DATA ELEMENT F, LDF (RLIN) | |
| a | 049069 |
| 942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA) | |
| Source of classification or shelving scheme | Dewey Decimal Classification |
| Koha item type | Book |
| Withdrawn status | Lost status | Source of classification or shelving scheme | Damaged status | Not for loan | Collection code | Home library | Current library | Shelving location | Date acquired | Cost, normal purchase price | Total Checkouts | Full call number | Barcode | Date last seen | Uniform Resource Identifier | Price effective from | Koha item type |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Dewey Decimal Classification | Sanskrit | St Aloysius Library | St Aloysius Library | 02/17/2021 | 100.00 | S491.5 SHAV | 049069 | 02/17/2021 | https://archive.org/details/TBNs_vyakaran-chandrodaya-part-2-by-sri-charu-deva-shastri-motilal-banarasi-das-delhi | 02/17/2021 | Book |